Wednesday, 8 April 2015

जिन्दगी का पहिया……

 जिन्दगी का पहिया……

हमारी जिन्दगी भी एक पहिये की तरह ही है, अगर वो न हो तो  मानो हमारी जिन्दगी थम सी ही जाये | हमारी जिन्दगी में पहिये का एक बड़ा ही एहम रोल है, हम भी पहिये की तरह निरंतर चलते ही रहते हैं, जैसे कि हमारे माँ – बाप में से अगर एक भी ना हो तो जिन्दगी डगमगा जाती है इन में से किसी एक की भी न होने की हम परिकल्पना भी नहीं कर सकते , इसलिए एक सफल जिन्दगी के लिए दोनों पहियों का होना भी  बेहद जरुरी है, क्यूंकि जिस तरह समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता जिन्दगी भी नहीं रुकेगी मगर उसका असर सदेव आपके जीवन पर रहेगा |
 हम बड़ी ही आसानी से कह देते है की किसी के जाने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, फर्क तो पड़ता है और पड़ेगा भी क्योकि हम मनुष्य है और ऐसी भावना प्रकट होना भी स्वाभाविक हैं | अगर हम बात करें प्राचीन काल की तो, तब हमें इतने अवसर ही प्राप्त नहीं होते थे कि, हम अपनी बात रख सके और साथ ही साथ न ही कोई होता था आपकी बात सुनने के लिए अगर मैं  महिलाओं की बात कहूँ तो उनकी स्तिथि काफी दयनीय थी उनके जिन्दगी का पहिया मानो कभी चला ही न हो, हम कहते है की हम बहुत  आगे निकल गये है अपनी जिन्दगी में, मगर मैं ये पूछना चाहूंगी उन लोगो से जो ये कहते है की, इतिहास बदल चुका है, इतिहास तो बदला है मगर महिलाओं के लिए नहीं, क्योकि उनके लिए आज भी वे  ही नियम कानून है जो पहले हुआ करते थे | बस तरीका बदल गया है, पहले चीजें परदे के पीछें हुआ करती थी, और अब साहस इतना बढ़ा हुआ है की सब आपकी आँखों के सामने होता है , या मैं यु कहूँ की आपको प्रत्यक्ष “live demo  देखने को मिलेगा , हमारी गाड़ी तो बढ़ रही मगर अपने उसूलो पे नहीं समाज द्वारा थोपे गये रास्ते पर, जो नियम कानून उन लोगों ने हमारे लिए बनाये है और ग्रंथो और भगवान् का हवाले दे कर हमें पसोपक्ष में डाल देते है और हमें सोचने को मजबूर कर देते हैं की हम जहाँ थे आज भी वही हैं | हमारें जीवन का पहिया अभी हिला भी ना हो और जब इसे कोई चलाने  की कोशिश भी करें , तो उसे ऐसी नज़रों से देखा जाता है जैसे मानो उसने कौन सा गुनाह कर दिया हो |
 अगर जीवन सबके साथ बीतना है तो अपने जीवन रूपी पहिये को तो चलाना ही पड़ेगा | हमें अपने  जिन्दगी के पहिये को समय पर समय पर “servicing” करने की भी जरुरत पड़ती हैं | और ये सर्विसिंग हम अपनी खट्टी-मीठी यादों से करतें हैं , जो हम कभी-कभी जीवन के सफ़र में इतना आगे निकल जाते है की, उन यादों को हम भूल जाता हैं ! जिन्दगी का पहिया हमेसा आगे ही चलता है अगर आप इसके साथ कदम से कदम मिला के नहीं चलेंगे तो आप पीछें रह जायेंगे और समय का पहिया कभी किसी के लिए नहीं रुकता तो जरुरी है की हम साथ चले | वरना ऐसे लोगो की कमी नहीं हैं जो समय के पहिये को दोष देने से पीछें नहीं हटते और आजीवन कोश्ते रहते है खुद को | हम जैसे लोगो ने ही जिन्दगी के पहिये को बदला है और आगे भी हम ही बदलेंगे बस जरुरत है तो दृढ-निश्चय और धैर्य की ,क्योकि जीवन का पहिया भी उन ही लगो का साथ देता है जो पुरे मन्न और लगन से अपने काम को अंजाम देते हैं | और दुसरो को बदलने से पहले खुद को बदले क्योकि पहल आपको पहले खुद बदल कर के ही करनी होगी तभी लोग आपका अनुसरण करेंगे | 

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